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Yogesh Kanava

Abstract Classics Inspirational

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Yogesh Kanava

Abstract Classics Inspirational

प्रेम गली

प्रेम गली

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छोड़ी जिसने ठाकरी

हुआ पार वो देखो

प्रेम गली अति सांकरी।


प्रेम रस बसावे 

प्रेम जस ही गावे

हुई वो मीरा बावरी।


मीरा भई प्रेम दीवानी

कहे कबीरा अपनी वाणी

प्रेम की है अपनी टापरी।


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