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Yogesh Kanava

Abstract Tragedy Others

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Yogesh Kanava

Abstract Tragedy Others

आदमी दिखावा हो गया

आदमी दिखावा हो गया

1 min
164


ना जाने कब कैसे 

ये छलावा हो गया 

देखते ही देखते 

आदमी दिखावा हो गया। 

सीने के ज़ख्मों को 

होंठों की बनावटी 

मुस्कान तले दबाकर 

अपने आपसे ही 

आदमी पराया हो गया। 

किसे थी ख़बर 

ये होगा मेरे साथ भी 

जाने कैसे मेरे दिल को 

ये गवारा हो गया 

खुद बन गया हूँ नुमाइश 

ज़माने के बाजार में 

किस से कहें कैसे कहे 

आदमी आज दिखावा हो गया। 


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