STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract

4  

aazam nayyar

Abstract

मुहब्बत के सहे सितम ख़ूब

मुहब्बत के सहे सितम ख़ूब

1 min
344

कौन रक्खे प्यार अपने के लिए !

लड़ रहे है लोग पैसे के लिए 


दिल भरा है ख़ूब लालच से यहाँ 

कौन लड़ता देखो रिश्ते के लिए 


और तू तैय्यार मिलने को नहीं 

शहर से आया हूँ मिलने के लिए 


कौन हूँ तेरा बता सबसे यहाँ 

बात मत कर यूं दिखावे के लिए


भूल जा तू जुल्म उसके प्यार के 

जीस्त में जो होता अच्छे के लिए


वो मुझे आज़म नहीं मिलता मगर 

फूल लाया हूँ जिस चेहरे के लिए! 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract