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Mukesh Bissa

Abstract

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Mukesh Bissa

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एक राह

एक राह

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पकड़ ली हमने राह 

अपनी एक अलग सी

और चल भी पड़े हैं

देखते है कि

हमारी मंज़िल 

कहां तक ले जाती है

साथ कबसे कब तक का है

ये तो समय की गर्त में है

अभी उन ख्वाबों के पीछे है हम

जिसे पूरा करने में 

बहुत पीछे रह गए हम

जिंदगी मौके देती है

सुबह उम्मीद देती है

जिंदगी की सुबह को बदलते हैं

नई शुरुआत करते हैं 

और जीवन बदल देते हैं

जिन से रिश्ता पुराना है 

चलो हम थोड़ा उन्हें मनाते हैं

रूठते मनाते 

जिंदगी यूं ही कट जाती हैं

प्यार से गुजारते हैं 

तभी जिंदगी आसान होती हैं



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