STORYMIRROR

vaishali Gurav

Abstract

4  

vaishali Gurav

Abstract

तुम आगे बढ रहे हो

तुम आगे बढ रहे हो

1 min
335

बार बार ये रोकेंगे

मुश्किलें ही मुश्किलें पैदा करेंगे

कभी निराश मत होना

समझना तुम आगे बढ रहे हो !


पीठ पीछे बुराई करेंगे

सामने आके खुब सराहना करेंगे

उनके बहकावे में आना मत

समझना तुम आगे बढ रहे हो


चुपकेसे चुगली कर के जायेंगे

कोशिश उनकी जारी रखेंगे

कभी खुद को कम आंकना मत

समझना तुम आगे बढ रहे हो

पत्थर पत्थर राहो में हो

दिखता कुछ भी आसान न हो

फिर भी हार के कभी रूकना मत

समझना तुम आगे बढ रहे हो


अपने देंगे हरदम साथ

पराये छोड़े भले ही हाथ

मंजिल दूर देख घबराना मत

समझना तुम आगे बढ़ रहे हो


कभी पतवार ढीली होने लगे

उम्मीद हाथ से छुटती दिखे

ढल रहे हो समझना मत

समझना फिरसे उग रहे हो !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract