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Yogesh Kanava

Inspirational

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Yogesh Kanava

Inspirational

ग़ज़ल

ग़ज़ल

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यहाँ रजतपथ सब धूल बन जायेंगे,
फूल भी दूंगा तो वो शूल बन  जायेंगे।

मैं जनता हूँ वक़्त ज़ालिम है बहुत,
किनारे भी ये मझधार बन जायेंगे।

वक़्त दुश्वार सही न पतवार सही ,
मेरे हाथ ही ये पतवार बन जायेंगे।

कमी नहीं है नाख़ुदाओं की यहाँ ,
हौसले ये खुद ऐतबार बन जायेंगे।

लगेगी सफ़ीना साहिल पर ज़रूर ,
ख़िज़ाँ के दरख़्त बहार बन जायेंगे।

पछताओगे तुम एक दिन ज़रूर ,
फूल अपने ही वो ख़ार बन जायेंगे।

- योगेश कानवा


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