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आलोक कौशिक

Romance

4  

आलोक कौशिक

Romance

प्रेम दिवस

प्रेम दिवस

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चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशी

मुख पर कुसुम सी कोमलता

तरूणाई जैसे उफनती तरंगिणी

उर में मिलन की व्याकुलता


जवां जिस्म की भीनी खुशबू

कमरे का एकांत वातावरण

प्रेम-पुलक होने लगा अंगों में

जब हुआ परस्पर प्रेमालिंगन


डूब गया तन प्रेम-पयोधि में

तीव्र हो उठा हृदय स्पंदन

अंकित है स्मृति पटल पर

प्रेम दिवस पर प्रथम मिलन।


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