STORYMIRROR

आलोक कौशिक

Romance

4  

आलोक कौशिक

Romance

प्रेम दिवस

प्रेम दिवस

1 min
538

चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशी

मुख पर कुसुम सी कोमलता

तरूणाई जैसे उफनती तरंगिणी

उर में मिलन की व्याकुलता


जवां जिस्म की भीनी खुशबू

कमरे का एकांत वातावरण

प्रेम-पुलक होने लगा अंगों में

जब हुआ परस्पर प्रेमालिंगन


डूब गया तन प्रेम-पयोधि में

तीव्र हो उठा हृदय स्पंदन

अंकित है स्मृति पटल पर

प्रेम दिवस पर प्रथम मिलन।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance