आलोक कौशिक
Abstract
कभी जुदाई लगती थी ज़हर
अब फ़ासले ज़रूरी हैं
जीने के लिए।
दर्द तो होता है दिल में मगर
हैं अब दूरियां लाज़मी
अपनों के लिए।
छूट न पाएगी कभी वो डगर
बढ़े हैं जिस पर क़दम
वतन के लिए।
सावन
वतन के लिए
ग़ज़ल
नन्हे राजकुमा...
बनारस की गली ...
जय श्री राम
साहित्य के सं...
प्रकृति
बहन
कवि सम्मेलन
फिटनेस सभी की जिंदगी का मूल मंत्र है इससे ही प्यार करना तुम्हें आना चाहिए। फिटनेस सभी की जिंदगी का मूल मंत्र है इससे ही प्यार करना तुम्हें आना चाहिए।
हमें उनका सम्मान और उनकी जीवन रक्षा करनी चाहिए। हमें उनका सम्मान और उनकी जीवन रक्षा करनी चाहिए।
पैसों से जिंदगी नहीं मिलती, करना है तो रक्तदान कीजिए। पैसों से जिंदगी नहीं मिलती, करना है तो रक्तदान कीजिए।
आत्मविश्वास भी काफी हो दृढ़संकल्प अविनाशी हो। आत्मविश्वास भी काफी हो दृढ़संकल्प अविनाशी हो।
प्राणों में प्रतीक्षातुर प्रीत लिए दिन फिर रात में खो जाता है ! प्राणों में प्रतीक्षातुर प्रीत लिए दिन फिर रात में खो जाता है !
रह जाता दिल में ये अरमान बना कर निकल जाते ये मुझे छछूंदर। रह जाता दिल में ये अरमान बना कर निकल जाते ये मुझे छछूंदर।
जी लो आज इन हँसी लम्हों को क्या पता कल हो न हो ये हसीं साथ। जी लो आज इन हँसी लम्हों को क्या पता कल हो न हो ये हसीं साथ।
लूट जाओगे सरे-आम तुम, चलती - फिरती राहों पर। लूट जाओगे सरे-आम तुम, चलती - फिरती राहों पर।
उत्तोलन हर भार का होगा - सतत् करें अभ्यास और प्रयास। उत्तोलन हर भार का होगा - सतत् करें अभ्यास और प्रयास।
नव-निर्माण होता है सदा पुरातन के भग्नावशेष से। नव-निर्माण होता है सदा पुरातन के भग्नावशेष से।
हाथ जोड़कर बंदगी बन जाती है जिन्दगी। हाथ जोड़कर बंदगी बन जाती है जिन्दगी।
वक़्त हाथ से गया फिसल तो अपने भी हो जाएंगे अनजान। वक़्त हाथ से गया फिसल तो अपने भी हो जाएंगे अनजान।
विश्वास आस्था बनी रहे उस शक्ति पर दुर्लभ मानव जीवन को सफल बनाऊं। विश्वास आस्था बनी रहे उस शक्ति पर दुर्लभ मानव जीवन को सफल बनाऊं।
लेकिन सबसे पहले अपने दादाजी भोग लगाते। लेकिन सबसे पहले अपने दादाजी भोग लगाते।
इनकी देखरेख भी करो जैसे अपने तन की करो। इनकी देखरेख भी करो जैसे अपने तन की करो।
जीवन के इस धर्मयुद्ध में अभिमन्यु सा मैं पाप मिटाने आया हूं। जीवन के इस धर्मयुद्ध में अभिमन्यु सा मैं पाप मिटाने आया हूं।
बच के भाग जा कोवीद प्यारे रणबांकुरे तैयार खड़े हैं। बच के भाग जा कोवीद प्यारे रणबांकुरे तैयार खड़े हैं।
कुछ और नहीं बस आपका साथ चाहते हैं। कुछ और नहीं बस आपका साथ चाहते हैं।
माँ की ममता ही सबसे बड़ा उपहार है। माँ की ममता ही सबसे बड़ा उपहार है।
कसरत की हसरत यही अब, मंगल चिंतन, योगासन, ध्यान। कसरत की हसरत यही अब, मंगल चिंतन, योगासन, ध्यान।