आलोक कौशिक
Abstract
कभी जुदाई लगती थी ज़हर
अब फ़ासले ज़रूरी हैं
जीने के लिए।
दर्द तो होता है दिल में मगर
हैं अब दूरियां लाज़मी
अपनों के लिए।
छूट न पाएगी कभी वो डगर
बढ़े हैं जिस पर क़दम
वतन के लिए।
सावन
वतन के लिए
ग़ज़ल
नन्हे राजकुमा...
बनारस की गली ...
जय श्री राम
साहित्य के सं...
प्रकृति
बहन
कवि सम्मेलन
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
अयोध्या लोटे सीता और दोनो भाई, ऐसा आनंद था छाया, मंगल गीत और ढोल नगाड़े , उत्सव था जैस अयोध्या लोटे सीता और दोनो भाई, ऐसा आनंद था छाया, मंगल गीत और ढोल नगाड़े , उत्...
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
गिली मिट्टी की खुशबू भी इस धरा से आती है अपने बच्चों को खुश देखकर भारत माता मुस्काती है गिली मिट्टी की खुशबू भी इस धरा से आती है अपने बच्चों को खुश देखकर भारत माता मुस...
तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे पैरों के नीचे एक ... तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हा...
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते। लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कु...
क्या भूल गए आप हमारे लल्ला पे हुआ जो दानव प्रहार। क्या भूल गए आप हमारे लल्ला पे हुआ जो दानव प्रहार।
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं. हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं.
थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं
शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्पहार से, अनघ हृद... शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्...
उधम सिंह फोटो काटकर, जेब में ली सरका। राम मोहम्मद सिंह आजाद, बाजू पे खुनवा। उधम सिंह फोटो काटकर, जेब में ली सरका। राम मोहम्मद सिंह आजाद, बाजू पे खुनवा।
ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा। ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा।
नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।। नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।।
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...
जिन्हें जेलों में होने था, देश के ठेकेदार वो बन बैठे है जिन्हें जेलों में होने था, देश के ठेकेदार वो बन बैठे है
बूढ़ी मां... जिसने शायद कुछ सालों पहले खाना पकाना छोड़ दिया था वह पकवान बनाती है बूढ़ी मां... जिसने शायद कुछ सालों पहले खाना पकाना छोड़ दिया था वह पकवान बनाती है