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Neeraj pal

Abstract Inspirational

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Neeraj pal

Abstract Inspirational

प्रेम-भाव युक्त होली।

प्रेम-भाव युक्त होली।

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मन खुश इस बात से होता है, कि जीवन में ये शुभ पर्व आते हैं।

 दुखद हृदय में खुशियाँ भरने, एक नया पाठ सिखलाते हैं।।


 पर्वों का मखौल बना, उलटा मतलब सबको सिखलाते हैं।

 अबीर-गुलाल की बात तुम छोड़ो, कीचड़ से मुख सनवाते हैं।।


 प्रकृति के नियमों को ताक पर रखकर, खुद अपने नियम बनाते हैं।

" एस्से -गुजियों" की बात तुम छोड़ो, भांग -मदिरा अपनाते हैं।।


 त्यौहार आया था खुशियाँ देने को, आसुरी- प्रवृत्ति अपनाते हैं।

 कुछ तो कहते, आज है मौका, जबरदस्ती पिलवाते हैं।।


 क्या सही है, क्या गलत, मान-मर्यादा सब भूल जाते हैं।

 बुद्धि- विवेक की बात तुम छोड़ो, मानवता पर दाग लगाते हैं।।


 पर्व हैं होते खुशियाँ भरने को, क्यों दुःख को गले लगाते हैं।

 संस्कारों को भूल सब जाते, ईर्ष्या- द्वेष भरते जाते हैं।।


 हे! प्रभु की अमूल्य कृति, बड़े भाग्य से ये पल आते हैं।

" नीरज" की सिर्फ एक गुजारिश, प्रेम-भाव से यह पर्व मनाते हैं।।


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