STORYMIRROR

Kawaljeet GILL

Drama

4  

Kawaljeet GILL

Drama

पोटली के रिश्ते

पोटली के रिश्ते

1 min
492

जाने कितने जाने पहचाने से

रिश्ते जुड़ जाते हैं अनजाने में ही

चुनते नहीं हम ये रिश्ते

ये तो जन्मों के रिश्ते होते हैं।


जन्म मिलते ही बन जाती है रिश्तों की

एक पोटली जो उम्र भर निभानी पड़ती है

माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी

चाचा-चाची, मौसी-मौसा, बुआ-फूफा

भाई-बहन, मामा-मामी लगते सब प्यारे प्यारे।


खून के ये रिश्ते चुनता नहीं

कोई मिलते हैं ये जन्म के साथ

खुशियों से भरते हैं झोली ये रिश्ते

पर दर्द भी इनसे ही मिलते हैं।


गैरो को भला कहाँ खबर होती है

चोट किस बात से लगती है हमको

अपनो को ही ख़बर होती है

पल पल की हमारी।


दोस्ती का ही रिश्ता ऐसा इस पोटली में

जो हम खुद चुनते है बनाते हैं

सच्चे दोस्त जो मिल जाये एक बार

जीवन में तो दर्द में भी खुशी मिल जाये।

 

इस पोटली का सब से अनमोल रिश्ता

दोस्ती का और हर बच्चे का अपनी माँ से

जिसको मिल जाये ये दो रिश्तों का संगम

जन्म उसका सफल हो जाये।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama