STORYMIRROR

सुरभि शर्मा

Tragedy

3  

सुरभि शर्मा

Tragedy

पोटली आदर्शों की

पोटली आदर्शों की

1 min
238

आदर्शों की पोटली बांधे 

गयी बड़े शान से 

भारत के सुनहरे भविष्य को 

ये समझाने, कि मत रो 

तेरे आँसू बड़े कीमती हैं |

सुनहरे भविष्य ने धीरे से 

मुझे देखा, और पूछा! 

कि अगर मेरे आँसू इतने कीमती हैं 

तो क्या इन्हें बेच 

मेरे दो वक़्त की रोटी 

जुगाड़ हो जाएगा? 

 मैं स्तब्ध, निरुतर, मौन 

चुपचाप सर झुकाए लौट आयी वहाँ से |

    

       


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy