भाग्य मेहंदी की लकीरों का
भाग्य मेहंदी की लकीरों का
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मांग में सिंदूर पड़ते, और
पिता के हाथ से
पति के हाथ में जाते ही
अचानक मेहंदी लगे दो हाथों
की लकीरों का भाग्य
पूरी तरह से बदल जाता है।
बदल जाता है उसका नाम
बदल जाती है जिम्मेदारियाँ
बदल जाती है घर की दहलीज
बदल जाती है उसकी पहचान।
हाँ, और जो नहीं बदलना चाहता
वो छुप जाते हैं अब आजीवन
भींगी पलकों की कोरों में
जैसे
माँ - पिता के प्रति चिंता
अपना लड़कपन, अपनी ज़िद
कुछ सुनहरे ख्वाब
कुछ खट्टे - मीठे अहसास
और सबसे खास
अपने संजीदगी भरे
बेफिक्र कुँवारेपन की खुशबू ।
