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सरफिरा लेखक सनातनी

Tragedy Others

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सरफिरा लेखक सनातनी

Tragedy Others

पंछी बन कर उड़ गए बड़ी मौज से

पंछी बन कर उड़ गए बड़ी मौज से

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पाला जिन्हें था शौक से 

पंछी बनकर उड़ गए बड़ी मौज से। 


जब बच्चे थे तुम को हर चीज लाता था 

कभी पैसा घर से 

कभी कर्ज से उठाता था। 


हर ख्वाहिश पूरी कि तुम्हारी

भूखा पेट मेरा रहा। 

तुम्हें ठंड ना लगने दी फिर 

चाहे नंगा बदन मेरा रहा। 

कल की चिंता आज ही थी 

मुझे तू आराम से सोते रहे। 

चिंता की चिंता में डूबा रहा 

मेरा सारी रात जगराता रहा। 


एक पिता क्या चाहता है सारी उम्र तुम से

पाला जिन्हें था शौक से

पंछी बनकर उड़ गए बड़ी मौज से। 


तुम्हारी ख्वाहिशों के लिए

 तुम्हारी मां के कुंडल कंगन बेचे। 

तुम्हें कपड़े दिला दूं तुम्हारी फीस भरा दूं

फिर घर के ईंधन बेचे। 

हम दोनों का लाठी बनकर सहारा थे तुम

बड़े होकर तुमने मंगलसूत्र

और घर के कागज बेचे। 

कुछ तो करते हमारी ख्वाहिश पूरी

मेरी पत्नी की आत्मा निकल गई

कहानी रह गई अधूरी। 


तुम्हें रखा मैंने किसी राजा के शौक से

पाला जिन्हें था शौक से 

पंछी बनकर उड़ गए बड़ी मौज से। 


मां की फटी साड़ी देखते 

पिता के कुर्ते की बनी जाली देखते

अरे कर्ज को चुकाता चुकाता बूढ़ा हो गया हूं 

की सोचकर याद करते तुम अपना बचपना

तुम्हारे हर सुख दुख में खुद को बेचा है

एक बार अपनी उम्र फिर मेरा बुढ़ापा देखते। 


लाचार हुआ हूं अपने ही करम से

पाला जिन्हें था शौक से

 पंछी बनकर उड़ गए बड़ी मौज से। 


पापा पापा कह कर उंगली पकड़ लिया करते थे

पैसे नहीं थे जेब में फिर भी

खिलौने की जिद किया करते थे 

सहमा सहमा चलता दुकान पर

इशारे में कुछ कह दिया करता था

ईमान नहीं गिरा अपना शान से जिया हूं

एक एक खिलौने के बदले दो-तीन दिन भूखा रहा हूं। 

 

मैं भाग्य का मारा क्या पूछूं अपने आप से

पाला जिन्हें था शौक से

पंछी बनकर उड़ गए बड़ी मौज से। 


एक दिन पंछियों तुम भी रोओगे 

अपना बुढ़ापा देख कर

मेरी तो कट गई कटनी थी जो उम्र

मेरा बुढ़ापा देख अपना भी याद कर लेना

मैं जितना रोया हूं अपने आंसू बचा लेना

बचा लेना अपने बेटों को अपने जैसे मत बना लेना

शर्म आए जरा सी भी तो मेरा बुढ़ापा देख रो लेना। 


घोंसला बना मेरा तिनके तिनके से 

बिखर गया एक आंधी में

इस उम्र में भी जवानी जी लेता हूं

बीती बातों को देख गम को पी लेता हूं। 


आंधी तिनके तिनके बिखर गए

 अब इधर मत आना

नया घोसला बनाऊं कैसे दुख बहुत है

 पंछी का उड़ जाना। 


मेरी उम्र जुड़ी है अंधेरे से

पाला जिन्हें था शौक से 

पंछी बनकर उड़ गए पड़ी मौज से। 



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