Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".
Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".

Amit Kumar

Romance


4  

Amit Kumar

Romance


पिता

पिता

1 min 218 1 min 218

वो जो मेरा हौसला हुआ करता था कभी

जाने किस बात पर ख़फा है अभी

उसकी ही सरपरस्ती में बनाया है खुद को मैंने

यह अलग बात उसको कहा नहीं कभी

वो ही मेरा रब है वो ही मेरा सब है

रूठा है मुझसे फिर मुस्कुराकर 

देख लेता है कभी - कभी

आइना है वो मेरा मैं अक़्स उसका हूँ

जाने क्यों और कहाँ मैं कितना उसका हूँ

वो रहता है मेरे दिल में धड्कनों सा मेरी

मुफ्तिला सा शख्स वो पिता है मेरा

ज़िंदगी भर पिसता रहा वो पिस रहा है अभी भी

ताकि ज़िंदगी कामयाब कुछ बन जाए मेरी।

           


Rate this content
Log in

More hindi poem from Amit Kumar

Similar hindi poem from Romance