पिता का प्यार
पिता का प्यार
पहला पग जब धरती में रखा
तब स्वाद था ममता का चखा
लिया थाम हाथ मेरा यों परखा
जैसे तप्त धरा पे सरसी बरखा
पिता का प्यार जीवन में सहारा
जब खेलें हम बादल से आवारा
जो देता दिल में अपने आसरा
बचपन के दिन भटकते बावरा
पिता की गोद शरण ठंडी छांव
जिसने मिटाये हर भ्रम के गांव
उसने शिक्षा के थे दीप जलाये
अंधेरे में ज्ञान रोशनी थे दिखाये
पिता का त्याग अनुपम अनमोल
जिसने लायक बनाया हमें तौल
वे मेरे सपनों की उड़ान के पंख
विश्वास उनका ताकत का शंख
हर मुश्किल ,गम में दिया साथ
हर चुनौती स्वीकारने में है हाथ
पिता का प्यार था मेरा हौसला
जैसे छोटे चूजे का नन्हा घोसला
आज वे न होकर भी हैं मेरे साथ
उनके दिये संस्कार होते सौगात
पिता ही बच्चों पत्नी का आधार
दिली दया दृगीसख्ती ईश साकार
आपके बिन जीवन होता अधूरा
आभार पिताजी प्यार से हुआ पूरा
जिंदगी का हर पल आपके लिए
आप सद्विचार हितार्थ थे मेरे लिए
दृगीसख्ती---आंखों में अनुशासन की कठोरता
