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Neetu singh Anjali

Drama

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Neetu singh Anjali

Drama

पीड़ा

पीड़ा

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पिस गया मनुज,

अपनी ही,

त्रासदी में।


वह खड़ा मौन,

असहाय निर्बल,

टूट गया सम्बल।


हार गया वह,

जीवन हुआ,

निरूपाय।


पीड़ा का,

"अंजलि" द्वीप,

ही शेष रहा।


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