फर्ज(गजल)
फर्ज(गजल)
फर्ज से पीछे मत हट जाना कभी
सच को मत छुपाना कभी।
दुखों से पिड़ित हो हमसाया अगर,
खुशी के तराने ना गाना कभी।
लहराते हुए खुशी के चमन को,
आग से मत जलाना कभी।
पेट भर खाना दो भूखे को,
मगर लालच में मत फँसाना कभी।
लदी हों फल फूलों से शाखांए जो,
जोर से मत हिलाना कभी।
दिल से कुछ और बाहर से कुछ और
दिखे ऐसा मित्र ना बनाना कभी।
शहद में मिलकर जहर बन जाए,
ऐसी मिलाबट न बनाना कभी।
फल न भी दे छांव ही सही
ऐसे पेड़ को ना कटवाना कभी।
डूबते को हमेशा सहारा देना
सुदर्शन, बेसहारा देख मत डूबाना कभी।
इन्सान हो तो इन्सानियत को जिन्दा ऱखना,
हैवानियत को न अपनाना कभी।
