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Bhavna Thaker

Romance

4.5  

Bhavna Thaker

Romance

पहली बारिश और तुम

पहली बारिश और तुम

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337


पहली बारिश की पहली बूंद का धरती को

छूना और तुम्हारा वो पहला चुंबन

की तुम याद आ गए..

बरसात की बूंदों से एक दर्द उठा आज

करारा की तुम याद आ गए..

छम छम बौछार से एक तप्त आह उठी

की तुम याद आ गए..


मेरा घरघराती बारिश में भीगने पर

वो तुम्हारा हथेलियों से मेरे सिर पर

छत बनाना की तुम याद आ गए..

तड़ीत की गूँज से मेरे दिल की

तन्हा सदाएँ सुनाई दी की तुम

याद आ गए..


बादलों के साये में उभरी तस्वीर जो

तेरी अनूठी की तुम याद आ गए..

चाँद जो छुपा बदली की ओट में वो

तेरी आगोश में छुपना मेरा शरमाकर

की तुम याद आ गए..

कभी बादलों का गरज कर बिन बरसे

चले जाना और तुम्हारा बेरुखी का

आलम ज़ालिम की तुम याद आ गए..

आग लगाती बारिश के मौसम में हरजाई

सनम तुम बहुत ही याद आ गए।।



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