पहले जैसी बात नही ...
पहले जैसी बात नही ...
पहले जैसी बात नही कहीं भी चले जाएं हम,
हर रिश्ता बेमानी सा लगता है हर कोई अपनी धुन में खोया है,
पहले सब को रिश्तो की कद्र हुआ करती थी,
अब तो सिर्फ नाम के रिश्ते रह गए पहले जैसी बात नही,
पहले रिश्तो की खातिर लोग सब कुछ भूल जाते थे,
जब से आया मोबाइल इंटरनेट हर कोई फ़ोन में खोया हुआ ,
किसी को किसी की फिक्र नही ऑनलाइन ही बाते कर लेते हैं खुश हो लेते हैं
अब तो दिन त्योहार पे शायद करीब रहते है तो मिल लेते हैं,
वरना महीनों तक कोई खबर नही कि अपने कहाँ रहते हैं,
मतलब की हो गयी है दुनिया मतलब के सब रिश्ते नाते,
पहले जैसी बात नही ना ही सच्चे दोस्त मिलते है ना ही सच्चे साथी,
कहाँ खो गए वो दोस्त हमारे पहले कभी मिल लिया करते है एक दूजे से,
अब तो बस उनको ऑनलाइन पर देख कर ही खुश हो लेते है,
हर कोई भाग रहा है पैसो के पीछे फुर्सत ही नही किसी को किसी से मिलने की,
पहले जैसी बात नही कलयुग है ये कोई सतयुग नही ।
वक्त के साथ हम भी खुद को बदल रहे,
क्या करे हम भी अब उन के जैसे होते जा रहे,
ये ही दुनिया की रीत है गर ना बदल सको किसी को,
तो खुद को ही बदल लो शायद ये ही सही होगा,
पहले जैसी बात नही पहले जैसी बात नही ।
