पहला प्यार - तुम .....!!
पहला प्यार - तुम .....!!
याद वो अपनी पहली मुलाकात
बात ही बात अपनी बढ़ी यूँ बात
तुम्हारा मुझे ख़ामोशी से देखना
मेरे ख्वाबों की लम्बी वो रात...............
धीरे से फिर तुम्हारा नंबर देना
बातों ही बातों में दोस्ती कर लेना
हसीं लम्हों की खूबसूरत है बात
अपनी चाहतों की कतारें लगा देना....
कभी भी कॉल हो या मेसेज
खुद को तुम तक पहुँचा देना
एक वादे को पूरा कर दूजा
अपने होने का मायने बता देना ....
एक समय से मिलना -मुस्कुराना
वो प्यारी -प्यारी बातों में लड़ना
कभी तुम्हारा मुझको इंतज़ार
गुस्से में तुम्हारा मुझे यूँ डाँटना ......
फिर एक मौसम पतझड़ मिला
जहाँ वफ़ा को बिछड़ना पड़ा
एक लम्हे से जैसे सदियों चुरा
तेरे- मेरे प्यार का पहला लम्हा सजा दिया....
तेरी -मेरी ख्वाहिशें अधूरी रह गयी
मन की मन सब धुंधली सी हो गयी
कुछ ख्वाब में दिल में यूँ बस गए
यादों के साये में ज़िंदगी रह गयी ....
कभी ना भुला पायी मैं तुमको
वो पहली बारिश , पहला इश्क़
वो पहली मुलाकात वो चाहत की बात
वक़्त के घेरे में दूर निकल आए......
सुन ए ! मेरी पहली ख्वाहिश तू आज भी मेरा पहला प्यार कहलाए...!!

