Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".
Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".

Mohit Agrawal

Tragedy


4  

Mohit Agrawal

Tragedy


फिर सुबह होगी

फिर सुबह होगी

1 min 192 1 min 192

आज खाली है वो चौराहा जहाँ कभी भीड़ हुआ करती थी, 

आज खाली है वो गलियाँ जहाँ कभी बच्चो की भीड़ हुआ करती थी, 

खाली है वो बाजार जहाँ अतरंगी दुकाने लगा करती थी, 

लग रहा है जैसे किसी ने चाँद से तारे छीन लिए हो, 

सूरज से उसकी किरणे छीन ली हो, 

बच्चो से उनकी आवाज़ छीन ली हो, 

खाली है वो मंदिर, वो मस्ज़िद  जहाँ दुआए हुए करती थी, 

अब बस दुआ हा उस ईश्वर से, उस खुदा से लौटा दे हँसी सारे जहां की..... 


Rate this content
Log in

More hindi poem from Mohit Agrawal

Similar hindi poem from Tragedy