राहुल द्विवेदी 'स्मित'
Action Inspirational
दुश्मनों की बस्तियों में जलजला आ जायेगा।
जब वतन की आबरू का मस'अला आ जायेगा।
तू हमारी छोड़, खुद की पैरवी मजबूत कर..
जब भी हम चाहेंगे उस पल, फैसला आ जायेगा।।
बदल गये हैं ख...
अगर चाहते हो ...
गीतिका छंद छं...
नेत्र यदि आपक...
आस लगाए बैठी ...
आदमी की अक्ल ...
एक मौसम शायरा...
एक ऐसा भी जमा...
दौर सतयुग का ...
साँसों का बुन...
इसीलिए कहती हूं दोस्तों हर किसी को देना पड़ता है प्यार का इम्तिहान। इसीलिए कहती हूं दोस्तों हर किसी को देना पड़ता है प्यार का इम्तिहान।
लोगों को ना पता है यूँ ही जलते है मुझसे। यह हस्ती बनी है बड़ी ही मेहनत करने पर लोगों को ना पता है यूँ ही जलते है मुझसे। यह हस्ती बनी है बड़ी ही मेहनत करने पर
उन्हें पाने की आरजू आ दिल में फिर से करें उन्हें पाने की आरजू आ दिल में फिर से करें
कड़वाहट में भी पल भर, मीठापन घोल जाती हैं कड़वाहट में भी पल भर, मीठापन घोल जाती हैं
औरों के ही हो प्यार के रंग हज़ार, मेरे तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम प्यार। औरों के ही हो प्यार के रंग हज़ार, मेरे तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम प्यार।
बन गयी थी हर गली शहर की मौज-ए-खून की बन गयी थी हर गली शहर की मौज-ए-खून की
ऐसे इंसानों के चंगुल में फंसकर और करो ना अपना भविष्य बर्बाद। ऐसे इंसानों के चंगुल में फंसकर और करो ना अपना भविष्य बर्बाद।
पढ़कर हर शख्स झूमता है उसके हर फ़साने पर। पढ़कर हर शख्स झूमता है उसके हर फ़साने पर।
उपजे अन्न अपार, हटे जगत की उदासी खूब बने बरसात, रहे ना धरती प्यासी। उपजे अन्न अपार, हटे जगत की उदासी खूब बने बरसात, रहे ना धरती प्यासी।
दबे-कुचले लोगों की आवाज़ को अल्फाज़ के रूप में अंकित करना होगा, दबे-कुचले लोगों की आवाज़ को अल्फाज़ के रूप में अंकित करना होगा,
भंवरे तितली गाते जाये, दादुर छेड़े मिलकर गान। भंवरे तितली गाते जाये, दादुर छेड़े मिलकर गान।
मुश्किल है सफर में उनको हम अब ना पाएंगे। मुश्किल है सफर में उनको हम अब ना पाएंगे।
चलो, हम आत्मनिर्भर भारत की जागृति हेतु ये दिव्य-दीप जलाएँ...!! चलो, हम आत्मनिर्भर भारत की जागृति हेतु ये दिव्य-दीप जलाएँ.....
तय मुकाम पाकर होगा अनुपम सबेरा दुआओं की नौका... तय मुकाम पाकर होगा अनुपम सबेरा दुआओं की नौका...
हमारा क्या है अब हम तुम्हारा शहर छोड़ते हैं। हमारा क्या है अब हम तुम्हारा शहर छोड़ते हैं।
तन्हा कहाँ हूँ रास्ता तो है संग मेरे। यह राह जानिबे घर को छोड़ती है। तन्हा कहाँ हूँ रास्ता तो है संग मेरे। यह राह जानिबे घर को छोड़ती है।
कर्म ही पूजा है दिल को सबक ये रटा तय मुकाम पाने पे होगा सुकून अपार कर्म ही पूजा है दिल को सबक ये रटा तय मुकाम पाने पे होगा सुकून अपार
पढ़कर भी मैं तुम्हारे सहायता कर दूंँगा यह विश्वास मैं तुम्हें दिलाना चाहता हूँ। पढ़कर भी मैं तुम्हारे सहायता कर दूंँगा यह विश्वास मैं तुम्हें दिलाना चाहता हू...
इनके खिलने खिलाने से, हमको क्या फ़ायदा ? जब बुत परस्ती में इनकी, जरूरत नहीं। इनके खिलने खिलाने से, हमको क्या फ़ायदा ? जब बुत परस्ती में इनकी, जरूरत नहीं।
मांगा जो खुदा से"रोहित"ये जहां मैं, कुबूल ए दुआ हो तुम...... मांगा जो खुदा से"रोहित"ये जहां मैं, कुबूल ए दुआ हो तुम......