राहुल द्विवेदी 'स्मित'
Action Inspirational
दुश्मनों की बस्तियों में जलजला आ जायेगा।
जब वतन की आबरू का मस'अला आ जायेगा।
तू हमारी छोड़, खुद की पैरवी मजबूत कर..
जब भी हम चाहेंगे उस पल, फैसला आ जायेगा।।
बदल गये हैं ख...
अगर चाहते हो ...
गीतिका छंद छं...
नेत्र यदि आपक...
आस लगाए बैठी ...
आदमी की अक्ल ...
एक मौसम शायरा...
एक ऐसा भी जमा...
दौर सतयुग का ...
साँसों का बुन...
रिश्तों के भीतर रंगीन प्रेम रिश्तों के भीतर रंगीन प्रेम
चुकाने की योग्यता बना पाऊँगा... चुकाने की योग्यता बना पाऊँगा...
यूँ तो अक्सर हम इंसानों की यही व्यथा-कथा है यूँ तो अक्सर हम इंसानों की यही व्यथा-कथा है
कुछ ही बरस हुए अभी आंख खोले हुए, कुछ ही बरस हुए अभी आंख खोले हुए,
वापस मिले ना मिले, फिर हो या ना हों कुछ पता नही, कुछ खबर भी नहीं। वापस मिले ना मिले, फिर हो या ना हों कुछ पता नही, कुछ खबर भी नहीं।
बस की बात नहीं... ये जान लीजिए ! बस की बात नहीं... ये जान लीजिए !
चादर को कर दिया किनारे रजाई और कंबल के स्वागत की तैयारी है।। चादर को कर दिया किनारे रजाई और कंबल के स्वागत की तैयारी है।।
मोहम्मद भाईजान! आप इस दुनिया के लिए मोहम्मद भाईजान! आप इस दुनिया के लिए
आपकी देखरेख में "आनंदालय" एवं 'विवेकानंद केंद्, असम" के अंतर्गत आपकी देखरेख में "आनंदालय" एवं 'विवेकानंद केंद्, असम" के अंतर्गत
अब मेरे अंदर भी शोर है और बाहर भी शोर हो रहा है अब मेरे अंदर भी शोर है और बाहर भी शोर हो रहा है
अपने स्वाभिमान को हमेशा ज़िंदा रखना... क्योंकि ये दुनिया अक्सर रईसों की दहलीज़ पे आकर दम तोड़ देती है..... अपने स्वाभिमान को हमेशा ज़िंदा रखना... क्योंकि ये दुनिया अक्सर रईसों की दहलीज़ पे ...
हमारे कंधे-से-कन्धा मिलाकर ईमान से चलने की सादिच्छा रखता है... हमारे कंधे-से-कन्धा मिलाकर ईमान से चलने की सादिच्छा रखता है...
जो वक़्त सम्हलने का था, वो भी बिछड़ गया जो वक़्त सम्हलने का था, वो भी बिछड़ गया
तन की डुबकी मात्र से ही, दूर होते मन भी सबके गम । तन की डुबकी मात्र से ही, दूर होते मन भी सबके गम ।
पर अब, चलो खुद को भी जीकर देख आते हैं, अपनी पसंद, अपनी राहें, अपने सपने सजाते हैं। पर अब, चलो खुद को भी जीकर देख आते हैं, अपनी पसंद, अपनी राहें, अपने सपने सजाते है...
अपनी इस 'इलेक्ट्रॉनिक' निर्भरशीलता अपनी इस 'इलेक्ट्रॉनिक' निर्भरशीलता
बिन बोले ,बिन सुने जो दिल की बात समझ जाये , बिन बोले ,बिन सुने जो दिल की बात समझ जाये ,
मोहब्बत करना चाहता दिल ये, मोहब्बत करना चाहता दिल ये,
रुक सी गयी सांसें , थम सा गया आसमां जहाँ का , रुक सी गयी सांसें , थम सा गया आसमां जहाँ का ,
तेरे मेरे सपने शब्द सच हैं। जिंदगी में चाहत बंसी हैं। तेरे मेरे सपने शब्द सच हैं। जिंदगी में चाहत बंसी हैं।