STORYMIRROR

Satyendra Gupta

Abstract

4  

Satyendra Gupta

Abstract

पेपर लीक होने का दर्द

पेपर लीक होने का दर्द

1 min
30

वर्षों के तैयारी के साथ 

पेपर देने जाते है

ढेरों सारी खुशियाँ लिए 

पेपर देने जाते है

मात पिता के मंसूबे को 

पूरा करने को तैयारियाँ है करते

रात दिन जागकर है पढ़ते रहते।


जब पेपर लीक होने की खबर आई।

हम सब कि आंखें भर आईं।

हमारे समय के पहले घर आने पर,

सबके मन में आशंका सी समाई।

पेपर लीक होने कि खबर सुन,

मात पिता कि आंखें भर जाते है

वर्षों के तैयारी के साथ

पेपर देने जाते है।


जो करते है पेपर लीक

क्या शर्म नहीं आती उनको

विद्यार्थी के साथ धोखाधड़ी करने में

क्या दिल साथ देता उनको

जमीर कैसे देता साथ उनका

विद्यार्थी जीवन याद आता नहीं उनको

इतना कुकर्म करके घर कैसे जाते है

वर्षों की तैयारी के साथ

विद्यार्थी पेपर देने जाते है।


ऐसे में कैसे उनका करियर आगे बढ़ेगा

ऐसे में कैसे विद्यार्थी का मनोबल बढ़ेगा

कब तक चलेगा भ्रष्टाचार का रेल

कब होगा भ्रष्टाचारियों को जेल

उनके कुकर्मों पे हमें शर्म आते है

चंद पैसे के खातिर अपना जमीर बेच जाते है

लाखों विद्यार्थियों का जीवन बर्बाद कर जाते है

वर्षों की तैयारी के साथ, विद्यार्थी पेपर देने जाते है।


कड़ा कानून बनाना होगा

ऐसे लोगों को उम्र कैद होना होगा

तब जाकर  ये कुकर्मी सुधरेंगे

तब जेपीएससी, यूपीएससी ,बीपीएससी 

करियर बन पाएगा अभ्यर्थियों का

मनोबल ऊंचा हो जायेगा अभ्यर्थियों का

बच्चों की सफलता से माता पिता

दिल से खुश हो पाते है

वर्षों की तैयारी साथ,

विद्यार्थी पेपर देने जाते है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract