STORYMIRROR

Amit Kumar

Abstract Inspirational

4  

Amit Kumar

Abstract Inspirational

पारदर्शिता

पारदर्शिता

1 min
267

दिल दर्पण से भी ज़्यादा

पारदर्शिता लिए हुए

दिमाग़ हर लिहाज़ से

सुगमता और सरलता लिए हुये

सादगी आपकी किसी का भी

मन मोहने को आतुर करें

ज़िंदादिली आपकी आपकी

सोहबत में रहने को

मज़बूर करें.. और भी बहुत कुछ है

जो अधीर कर देता है

आपका एक ज़िक्र मुझे

सबसे छीन लेता हूँ

हिमालय सी ऊंचाई

आपके क़िरदार में रहें

वो शमां भी जल उठे

जो आपके दीदार में रहें

खुशकिस्मती बहारों की

श्रंगार करे आपका

अलंकारों सी मादकता लिए

चांद भी निहार करें आपका

खुदाया रहमत से आप

सदा महफूज़ रहे

जिंदगी में आप सदा

महकती चहकती रहे...

मेरी शुभकामनाएं नहीं है

निमन्त्रण है आगामी खुशियों का

आपका यह मुस्कुराता चेहरा

लगता है गुलदस्ता गुलाब से भरे फूलों का....

                  


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract