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Akanksha Gupta

Romance


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Akanksha Gupta

Romance


नज़रों से कह दो

नज़रों से कह दो

1 min 207 1 min 207

नज़रों से कह दो यूँ सितम ना ढाए हम पर

हम तो यूँ ही मदहोश है तेरे बेफिक्र हुस्न पर 


तेरी मोहब्बत की तपिश में पिघल रहा हूँ मैं

हुकूमत होने लगी है अब तेरी मेरी रूह पर


दरिया-ए-चश्म में डूब कर पाया है खुद को

जो लुटाया है खुद का वजूद हमने तुम पर


मेरे ख्वाबों की मल्लिका बन तुम हो आए

दिल की जुम्बिश मे तुम हो मुहर्रिक बन कर


आज भी गुमनाम सी है मेरे इश्क़ की कहानी

फिर भी नाम हुआ है हमारा तुमसे मिलकर।


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