नवयुग का नवभारत
नवयुग का नवभारत
स्वतंत्र भारत की तुमको मैं, तस्वीर दिखाने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का मैं, नवगीत सुनाने आया हूँ।
इक भारत दिखता हैं हमको,चाँद और तारों को छूता।
इक भारत दिखता है हमको,आदम युग में जो है जीता।
नवभारत का तुमको अब मैं,भविष्य बताने आया हूँ।
नवयुग के नव भारत का....
सभी जानते इन बातों को, हमें ज्ञान से शिक्षा मिलती
ज्ञान बिना जीवन आधा है,लेकिन अब शिक्षा की चलती
शिक्षा और ज्ञान का अंतर,सबको समझाने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का......
झूठ कपट था कभी न दिखता,अब तो वह सच पर भारी है।
कपटी सब पर राज करें अब, सज्जनता प्रतिपल हारी है।
सच झूठ के बीच का तुमको, मैं फर्क बताने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का.......
वर्षो वर्षो तक भारत को जाने कितने युद्ध मिलें है।
संतो की इस धरती पर तो,शायद कुछ ही बुद्ध मिलें है।
युद्ध बुद्ध में श्रेष्ठ कौन है, मैं ये बतलाने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का......
राजनीति के कारण भारत, युगों युगों तक बँटता आया।
इसके कारण भारत माँ का, शीश सदा ही झुकता आया।
भारत माँ के झुकते सर को, मैं यहाँ उठाने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का....
रावण नया रूप ले आता, मगर राम का पता नही है
हर साल नया रावण जलता,लेकिन अब तक मरा नही है
रावण फिर से जन्म न पाए, यूँ उसे जलाने आया हूँ
नवयुग के नवभारत.....
मानवता पर दानवता क्यों , भारी इस युग में होती है।
दानवता अट्टहास करती है, मानवता छुपकर रोती है।
राम की धरा के इंसानों, मैं तुम्हे जगाने आया हूँ।
नवयुग के नवभारत का.....
