STORYMIRROR

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

4  

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

मैं और मेरा मन

मैं और मेरा मन

1 min
399


जोड़ कर अक्षर एक एक

मन के भाव लिखती हूं

जुड़े हुए इन अक्षरों में

दिल के राज पड़ती हूं


दबे राज़ अंतरात्मा के

बाहर आने को तड़पते हैं

छुपे रहें ये कोई पड़ न पाएं

मैं लाख कोशिश करती हूं


मन को तसल्ली देती हूं

कि कर्म कभी बदलते नहीं

पर विचारों के कशमकश में

बस कुछ शब्द उकेर देती हूं


न भाषा जानूँ न ही कोई विधि

इन सबसे दूर थी मैं बहुत

इक चिंगारी मन में आ बैठी

उंगलियां अब थिरकती रहती हैं


मेरे विचारों का हजूम

अक्सर मुझसे करते सवाल

यह शैली तेरी नई नई

क्या मायने कोई रखती है


बोलती हूं ए मेरे दोस्तो

नहीं चाहिए ख्याति या धन

बस आत्मा मेरी हंसती रहे

मैं मन की खुशी चाहती हूं......



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational