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Shailaja Bhattad

Romance


5.0  

Shailaja Bhattad

Romance


नूर

नूर

1 min 119 1 min 119

तेरी राहों पर चलने का जब इरादा किया

तुझसे मिलने की आरजू मुकम्मल होती गई

हर रंग में मैं रंगती चली गई।


मुसलसल यह सिलसिला चलने लगा

तबस्सुम से नूर मेरा खिलने लगा। 


जब से जाना संग मेरे है तू सनम,

उमंगों की तरंगों से साज़ बजने लगा

रूह संवरने लगी

ख्वाहिशों पर विराम लगने लगा।।


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