STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Romance

2  

Shailaja Bhattad

Romance

नूर

नूर

1 min
154

तेरी राहों पर चलने का जब इरादा किया

तुझसे मिलने की आरजू मुकम्मल होती गई

हर रंग में मैं रंगती चली गई।


मुसलसल यह सिलसिला चलने लगा

तबस्सुम से नूर मेरा खिलने लगा। 


जब से जाना संग मेरे है तू सनम,

उमंगों की तरंगों से साज़ बजने लगा

रूह संवरने लगी

ख्वाहिशों पर विराम लगने लगा।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance