नश्वर काया का क्या...
नश्वर काया का क्या...
ओ भवानी, तेरे मन्दिर में दीपक जलाना है,
तम से भरे जीवन को रोशनी से सजाना है।
सब से प्रेम कर सके अब कुछ ऐसा करना है,
अपनी भक्ति से तेरे हृदय में जगह बनाना है।
ओ अम्बे मैया इस काया से सत्कर्म करना है,
कभी कोई दुखी ना हो सबको ख़ुश करना है।
नश्वर काया को भक्ति की अग्नि में जलाना है,
तम से भरे जीवन को रोशनी से सजाना है।
ओ दुर्गे, तेरे आंगन से खाली ना कोई जाए,
इतनी है अरज मैया तेरा दरबार लगाना है।
तन मन धन सब तेरे चरणों में अर्पण करना है,
भक्ति मुक्ति दे दो माँ जीवन सफल बनाना है।
ओ शरन्या, तेरे मन्दिर में दीपक जलाना है,
तम से भरे जीवन को रोशनी से सजाना है।
