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Anshu Shri Saxena

Tragedy

3  

Anshu Shri Saxena

Tragedy

नशा

नशा

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नशे की बात न करिये दोस्तों,

नशे के हैं इस दुनिया में रंग हज़ार !

भिन्न भिन्न हैं नशे के रूप और प्रकार 

कुछ तो हैं आज़माइश के क़ाबिल,

कुछ दर्शाते हैं केवल मानसिक विकार !


किसी को है मुहब्बत का गुलाबी नशा,

जो नैनों के मय के प्याले देख परवान चढ़ता है !

कहीं है कामयाबी का चढ़ता नशा,

जो गर्व के दर्प में चूर हो बिखरता है !


कहीं किसी को है दौलत का नशा,

जो ग़रीब की ख़ुशियों की क़ीमत पर पलता है !

तो कहीं है किसी को सत्ता का नशा,

जो मुँह लगे ख़ून सा कभी नहीं छूटता है !


कहीं है ख़ूबसूरती का अंधा ग़ुरूर 

कहीं है मदिरा का चढ़ता सुरूर,

जाने कितनी ज़िन्दगियों से खेलता है !

पहना कर पाँवों में नशे की बेड़ियाँ,

लोगों के सपनों को सदा तोड़ता है !


हज़ारों औरतों की सूनी कर कलाइयाँ,

बेरहम बन लाता है बस बरबादियाँ !

चारों ओर फैला नशे का काला कारोबार

दिन दूना रात चौगुना बढ़ता ये व्यापार,

हर कोई है किसी न किसी नशे में चूर !

इसकी बेड़ियों में जकड़ा हालात से मजबूर !


नशा कोई भी हो अक्सर बनता पतन का कारण है,

इससे सजग और दूर रहना ही एकमात्र निवारण है !


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