STORYMIRROR

akhilesh kumar

Tragedy

4  

akhilesh kumar

Tragedy

नपुंसक

नपुंसक

1 min
179

नपुंसक 

नामर्द 

.... का 

हर बार बही 

मतलब नहीं होता 

चुप रहना 

सच को सच 

न कहने वाले भी

नपुंसक 

नामर्द 

होते 

आज के हालातों में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy