STORYMIRROR

akhilesh kumar

Others

4  

akhilesh kumar

Others

लड़कियां

लड़कियां

1 min
284

लड़कियां !

अपने ही घर में

तराशी जातीं

पराये घर को

खुश रखने के लिए।

लड़कियां !!

इक दिन

दान कर दी जातीं

बिना मरजी जाने।

लड़कियां !!!

रात को चुपके से खोलतीं

दुपट्टे की गांठ 

और दिये की लौ में परखतीं

रिश्तों में अपनापन

लड़कियां !!!

कलमबंद बयान नहीं

जुबानी हलफनामा होती हैं।


Rate this content
Log in