akhilesh kumar
Thriller
चौराहे सूनसान हैं
फांसी पर चढ़ा दो
मेरी आवाज
जैसे पाश
मरने के बाद जिन्दा हैं
नागार्जुन
केदारनाथ
मैं भी जिन्दा रहूंगा
कुछ लोग
मरने के बाद भी
जिन्दा रहते
जम्हूरियत के लिए
लड़ने के वास्ते।
तजुर्बे से सम...
जनता
नपुंसक
चौराहे सूनसान...
कोई शहर
मुझे पता है
पगडंडी
अमेरिका
लड़कियां
नदियों में
हर हाल में मुसकुराते हुए जीना है। हर हाल में मुसकुराते हुए जीना है।
बचा कर उसने उसको अपने हाथ को, लहूलुहान किया बचा कर उसने उसको अपने हाथ को, लहूलुहान किया
मेरे दिल में दौड़कर समाजाओ "मुरली", मेरे इश्क को तू न समजे तो मै क्या करुं? मेरे दिल में दौड़कर समाजाओ "मुरली", मेरे इश्क को तू न समजे तो मै क्या करुं?
टाइपिंग है नहीं कोई खेल यह समझ लीजिये। टाइपिंग है नहीं कोई खेल यह समझ लीजिये।
इश्क के बिना दुनिया में "मुरली", इन्सान जिंदा मुर्दा बन जाता है। इश्क के बिना दुनिया में "मुरली", इन्सान जिंदा मुर्दा बन जाता है।
तू चुपके से आती है, मैं तेरा इंतजार करता हूं, तू चुपके से आती है, मैं तेरा इंतजार करता हूं,
कभी तो बांहोंमें समाया करो "मुरली", हम तो तुम्हारे चाहनेवालें है। कभी तो बांहोंमें समाया करो "मुरली", हम तो तुम्हारे चाहनेवालें है।
राखी पावन प्रेम की , वादे - रस्म अटूट। गहना बंधन नेह का , कहीं न जाए टूट राखी पावन प्रेम की , वादे - रस्म अटूट। गहना बंधन नेह का , कहीं न जाए टूट
आत्मा में असीम ऊर्जा भर देता है। आत्मा में असीम ऊर्जा भर देता है।
इस बार नए साल पर मैं घर नही आ पाऊंगा । इस बार नए साल पर मैं घर नही आ पाऊंगा ।
चाँदी से जुड़े रहस्य अनावृत होंगे, महाशक्तियों में चौथा देश बनेगा भारत। चाँदी से जुड़े रहस्य अनावृत होंगे, महाशक्तियों में चौथा देश बनेगा भारत।
"मुरली" के दिलमें समा जा सनम, इश्क के सिवा दुनियामें रखा क्या है ? "मुरली" के दिलमें समा जा सनम, इश्क के सिवा दुनियामें रखा क्या है ?
गाँधी सुभाष नेहरू से इंसान कहाँ है सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान कहाँ है। गाँधी सुभाष नेहरू से इंसान कहाँ है सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान कहाँ है।
आओ हम सभी उम्मीद के साथ साथ जीते हैं। जिंदगी में सच और हकीकत को पहचानते हैं। आओ हम सभी उम्मीद के साथ साथ जीते हैं। जिंदगी में सच और हकीकत को पहचानते हैं।
रंगमंच में सच सपने आँखों में होते हैं। आज कल बरसों के साथ हम रहते हैं। रंगमंच में सच सपने आँखों में होते हैं। आज कल बरसों के साथ हम रहते हैं।
क्योंकि प्रेम का आकार बढ़ता है बहुत बढ़ता है। क्योंकि प्रेम का आकार बढ़ता है बहुत बढ़ता है।
बस यकीन मानो या मानते हैं। आज दौलत को सभी पूजते हैं। बस यकीन मानो या मानते हैं। आज दौलत को सभी पूजते हैं।
अंजान बने अब वो, जो जान से प्यारे थे, हुए दूर 'भारती' वो, संग खाए खेले हैं। अंजान बने अब वो, जो जान से प्यारे थे, हुए दूर 'भारती' वो, संग खाए खेले हैं।
उसपे बीती वो जाने भला समझ कैसे सके कोय।। उसपे बीती वो जाने भला समझ कैसे सके कोय।।
धरती की रक्षा है सदैव उनका काम, वीर रस से प्रेरित, बन जाएं हम भी धैर्यवान। धरती की रक्षा है सदैव उनका काम, वीर रस से प्रेरित, बन जाएं हम भी धैर्यवान।