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akhilesh kumar

Thriller

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akhilesh kumar

Thriller

चौराहे सूनसान हैं

चौराहे सूनसान हैं

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चौराहे सूनसान हैं 

फांसी पर चढ़ा दो 

मेरी आवाज 

जैसे पाश 


मरने के बाद जिन्दा हैं 

नागार्जुन 

केदारनाथ 


मैं भी जिन्दा रहूंगा 

कुछ लोग 

मरने के बाद भी 

जिन्दा रहते 

जम्हूरियत के लिए 

लड़ने के वास्ते।


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