akhilesh kumar
Thriller
चौराहे सूनसान हैं
फांसी पर चढ़ा दो
मेरी आवाज
जैसे पाश
मरने के बाद जिन्दा हैं
नागार्जुन
केदारनाथ
मैं भी जिन्दा रहूंगा
कुछ लोग
मरने के बाद भी
जिन्दा रहते
जम्हूरियत के लिए
लड़ने के वास्ते।
तजुर्बे से सम...
जनता
नपुंसक
चौराहे सूनसान...
कोई शहर
मुझे पता है
पगडंडी
अमेरिका
लड़कियां
नदियों में
करते रहो प्रयास सदा, पूरी होगी जन की चाह।। करते रहो प्रयास सदा, पूरी होगी जन की चाह।।
माहौल खराब नहीं है लेकिन आपका दिमाग ऐसा है। माहौल खराब नहीं है लेकिन आपका दिमाग ऐसा है।
और गाँव की फसलें लहराये तब ! लौट आना। और गाँव की फसलें लहराये तब ! लौट आना।
भावनाओं पर ही जीवन चक्र है, भावनाओं बिना सब वीरान है। भावनाओं पर ही जीवन चक्र है, भावनाओं बिना सब वीरान है।
मुझको हीं मुझमें पहेली बना दिया था। मुझको हीं मुझमें पहेली बना दिया था।
आधी रात की वो फुसफुसाहट। याद करती है फिर पूरी रात तुम्हारा प्यार। आधी रात की वो फुसफुसाहट। याद करती है फिर पूरी रात तुम्हारा प्यार।
एक मिलकर दो नहीं एक होता है। एक मिलकर दो नहीं एक होता है।
दैहिक सुख भी चरम सुख नहीं है। दैहिक सुख भी चरम सुख नहीं है।
तू, रूठ जाना, मैं मना लूँगा तेरी खातिर मैं आँखें जला लूँगा। तू, रूठ जाना, मैं मना लूँगा तेरी खातिर मैं आँखें जला लूँगा।
ज़ात मज़हब की सियासत में हीवो हमें खूब लड़ा देते हैं। ज़ात मज़हब की सियासत में हीवो हमें खूब लड़ा देते हैं।
जीव नलिकाओं की शक्तिता लादकर जलधि तट पाने वह खग उड़ रहा है।। जीव नलिकाओं की शक्तिता लादकर जलधि तट पाने वह खग उड़ रहा है।।
अब क्यूँ तलब करूँ प्यार अपना जो किसी के दिल में आ ही गए। अब क्यूँ तलब करूँ प्यार अपना जो किसी के दिल में आ ही गए।
बल से मिलती इसके भारत को पूरे विश्व में प्रसिद्धि और ख्याति.. बल से मिलती इसके भारत को पूरे विश्व में प्रसिद्धि और ख्याति..
भूली बिसरी खट्टी मीठी कसैली यादें। भूली बिसरी खट्टी मीठी कसैली यादें।
प्रकाश की एक चिंगारी प्रकाश के एक सतत चक्र की उपस्थिति प्रकाश की एक चिंगारी प्रकाश के एक सतत चक्र की उपस्थिति
जो तू मुझे दूर करके.. अपनी आँखों से दरिया बहायें जा रही हो...! जो तू मुझे दूर करके.. अपनी आँखों से दरिया बहायें जा रही हो...!
आम की मंजरियों को थामे हाथी जैसा वसंत आया।। आम की मंजरियों को थामे हाथी जैसा वसंत आया।।
मेरे इश्क में वो तलबगार थे कभी आज तो रूठने का तो मौका अपने। मेरे इश्क में वो तलबगार थे कभी आज तो रूठने का तो मौका अपने।
लौटने शुभ अवसर न आएगा, केसर की क्यारी में भी अब तिरंगा लहराएगा। लौट आओ पूजनीय। लौटने शुभ अवसर न आएगा, केसर की क्यारी में भी अब तिरंगा लहराएगा। लौट आओ पूज...
कच्चा होगा धागा तो, कच्चा ही रह जायेगा छोटी सी बात का भी बतंगड़ बन जायेगा तब। कच्चा होगा धागा तो, कच्चा ही रह जायेगा छोटी सी बात का भी बतंगड़ बन जायेगा तब।