akhilesh kumar
Thriller
चौराहे सूनसान हैं
फांसी पर चढ़ा दो
मेरी आवाज
जैसे पाश
मरने के बाद जिन्दा हैं
नागार्जुन
केदारनाथ
मैं भी जिन्दा रहूंगा
कुछ लोग
मरने के बाद भी
जिन्दा रहते
जम्हूरियत के लिए
लड़ने के वास्ते।
तजुर्बे से सम...
जनता
नपुंसक
चौराहे सूनसान...
कोई शहर
मुझे पता है
पगडंडी
अमेरिका
लड़कियां
नदियों में
और वह छोड़ देता है अपनी पहले दिन कि गिरी हुती चीजें जिसे उसने गिरते वक्त गिरायी थी। और वह छोड़ देता है अपनी पहले दिन कि गिरी हुती चीजें जिसे उसने गिरते वक्त गिरा...
विधाता के' कदमों में' सर ये पड़ा है। विधाता के' कदमों में' सर ये पड़ा है।
तब क्यूँ हाथ बाँधकर बैठ जाएँ तकदीर लिख दे अपनी हथेली पर ! तब क्यूँ हाथ बाँधकर बैठ जाएँ तकदीर लिख दे अपनी हथेली पर !
उमर गई तो... मेंहदी गई..! समय आता नहीं हैं। बदलाव होता हैं। ओर तेरी मेंहदी, वो भी उमर गई तो... मेंहदी गई..! समय आता नहीं हैं। बदलाव होता हैं। ओर तेरी ...
लाशों के ढ़ेर पे, कैसे दिवाली मनायेगा, होली दिल में धधकेगी, लाशों के ढ़ेर पे, कैसे दिवाली मनायेगा, होली दिल में धधकेगी,
चलो कहीं घूमने चलते हैंं, कहीं दूर भूल सब कहीं विचरते हैं। चलो कहीं घूमने चलते हैंं, कहीं दूर भूल सब कहीं विचरते हैं।
इनकी हिफाज़त में ही हमारी कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है। इनकी हिफाज़त में ही हमारी कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है।
अपने मन के इस मंदिर में, एक खुशी का दीया जला लो ना।। अपने मन के इस मंदिर में, एक खुशी का दीया जला लो ना।।
अब तो दिल ही नहीं कहता छोड़कर जाने का। जो इक मुलाकात में आहें भर बैठे।। अब तो दिल ही नहीं कहता छोड़कर जाने का। जो इक मुलाकात में आहें भर बैठे।।
ऑल द बेस्ट है सबको अच्छे नम्बरों की मुझे आस। ऑल द बेस्ट है सबको अच्छे नम्बरों की मुझे आस।
संघर्ष में नहीं पीछे, यह नर से। किस पद पर, नहीं पहुंची नारी।। संघर्ष में नहीं पीछे, यह नर से। किस पद पर, नहीं पहुंची नारी।।
सोचते सोचते बीत जाता है वो लम्हा जिसके लिए करते इंतजार सदियों से हम।। सोचते सोचते बीत जाता है वो लम्हा जिसके लिए करते इंतजार सदियों से हम।।
बाहरी दिखावट तो सिर्फ हमदर्दी के लिए करते है, वो पहली सी मोहब्बत। बाहरी दिखावट तो सिर्फ हमदर्दी के लिए करते है, वो पहली सी मोहब्बत।
देश किया खुशहाल, नमन हो नायक अपने। देश किया खुशहाल, नमन हो नायक अपने।
इसी प्रकार चेहरे की हालत, बिगड़ी नजर आती हैं। हे शशिबाला ! क्या हुआ ! इसी प्रकार चेहरे की हालत, बिगड़ी नजर आती हैं। हे शशिबाला ! क्या हुआ !
वो शिशिर की प्रभात वो गहराता अति कोहरा। वो शिशिर की प्रभात वो गहराता अति कोहरा।
महबूब से मुलाकात पर अब अज़ल नहीं लिखते। महबूब से मुलाकात पर अब अज़ल नहीं लिखते।
स्वयं हम भी बदल सकते हैं उन गलतियों से सीखकर। स्वयं हम भी बदल सकते हैं उन गलतियों से सीखकर।
जीवन मिला है एक उसे यूँ ना तबाही मचाने में बिता, एक एक श्वास है क़ीमती इसे प्यार में ल जीवन मिला है एक उसे यूँ ना तबाही मचाने में बिता, एक एक श्वास है क़ीमती इसे प्...
मोह जाल की बेले तोड़ ॥ नारी शक्ति हो........॥४॥ मोह जाल की बेले तोड़ ॥ नारी शक्ति हो........॥४॥