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Aryan Sethi

Inspirational Thriller

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Aryan Sethi

Inspirational Thriller

मुझको रोक न पाओगे

मुझको रोक न पाओगे

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मैं बहता जल हूँ नदियों का

तुम कितने बाँध बनाओगे

आवेग में बहता जाऊँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


एकलव्य सी एकाग्रता है मुझमें

तुम कितने अंगूठे काटोगे

हर लक्ष्य को पाता जाऊँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मैं वीर अभिमन्यु की माटी का हूँ

तुम कितने षड्यंत्र रच पाओगे

हर चक्रव्यूह को भेद बढूँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मिटने वाला मैं नाम नहीं

तुम कितने जतन लगाओगे

हर पत्थर की धार पर

हीरा बनता जाऊँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


कर कोशिश जितनी कर पाओ

तुम कितने बाण चलाओगे

खुद की ढाल मैं स्वयं बनूँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मैं जल जल कर स्वयं रोशन हुआ

तुम कितने ग्रहण लगाओगे

आसमान का चीर के सीना

फिर रोशन हो जाऊँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मैंने संघर्षों में जीवन पाया

तुम कितना ज़ोर लगाओगे

तुम कितना मुझको गिराओगे

हर बार नयी चेतना से मैं फिर खड़ा हो जाऊंगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मैं अब वो मोम का बुत नहीं

तुम कितने पत्थर फेंकोगे

हर कंकड़ को थाम मैं

चट्टान बनता जाऊँगा

तुम मुझको रोक न पाओगे


मैं अब वो नन्ही चिंगारी नहीं

तुम कितना मुझसे खेलोगे

अग्नि से भरी ज्वाला बनूँगा

तुम इसमें स्वयं जल जाओगे

तुम मुझको रोक न पाओगे



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