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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

Abstract

नफ़रत

नफ़रत

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चंद नफरतों को सींचने वाले

अपने अहं की आग से 


शहरों को तबाह कर देते हैं

अपनी स्वार्थ की आग में


हँसते खेलते परिवारों को

बेजार कर देते हैं।


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