STORYMIRROR

monika kakodia

Tragedy

4  

monika kakodia

Tragedy

नन्ही चिड़िया

नन्ही चिड़िया

1 min
539

पलंग के नीचे छुपी बैठी है

डरी सहमी नन्ही गुड़िया

ऐसी लगती जैसे क़ैद है

पंख सिकोड़े पिंजरे में चिड़िया


भाव बहुत है मन मे उमड़े

होठों पर खामोशी पसरी

डर और दर्द की बरखा मिलके

झुकी हुई आंखों से बरसी


माँ की सिसकी अब भी जैसे

उसके कानों में गूँज रही है

दबे गले से माँ की चीखें

लाडो का हाल बूझ रहीं है


मां मुझे अपनी ममता के

प्यारे दामन में भर लो

माँ मेरे मन के सारे

दर्द और डर को हर लो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy