शाम का इंतिज़ार
शाम का इंतिज़ार
1 min
124
शाम से इंतजार रहता है कि
ढल जाए ये सूरज
आएं चाँद सितारे ऊँचे नील गगन में
मिल जाएं फिर सारे
कुछ मुस्काते कुछ जगमगाते
जैसे टोली बनाये बैठे हों
कुछ नटखट करने को
हंसी ठिठोली दिनभर की
अठखेली से थका हुआ
एक ग्वाला जैसे सुनकर माँ की लोरी
पा ले स्वपन सलोना
प्यासी बैठ चकोरी
जैसे कोई जोगी घूँट घूँट
चांदनी से कर जाए कंठ तर
बाट देखता जैसे भटके कोई जुगनू
पा जाएं हर राहें देख के
चाँद सितारे शाम से
इंतजार रहता है कि
ढल जाए ये सूरज
