निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत
निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत
निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत,
जो कम करेंगे अपनी कुछ चाहत।
अलभ्य तृष्णाओं के जंजाल को,
जो मोहवश ही न तोड़ पाएंगे हम।
हो आनंद लुप्त जीवन शब्दकोष से ,
हमें घेरते रहेंगे नित्य नूतन से गम।
त्याग सकेंगे जो व्यर्थ की अपेक्षाएं,
टलेगी आनंद की बैरन हर आफत।
निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत,
जो कम करेंगे अपनी कुछ चाहत।
कुछ भी तो नहीं है घटता हमारा,
करते जो हम एक दूजे का सम्मान।
दृढ़ संकल्प संग जीवन लक्ष्य बने जो,
न करना और न ही सहना अपमान।
वसुधैव कुटुम्बकम् भाव रखकर सभी,
होंगे अभय और सर्वत्र होगी शराफत।
निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत,
जो कम करेंगे अपनी कुछ चाहत।
कोई तृण भी न लाया है नश्वर जगत में,
सबको पता है न कुछ भी है ले जाना।
दृष्टिकोण सकारात्मक अपनत्व भावना,
करे सबको निर्भय साकार सपना बनाना।
मनसा वाचा कर्मणा दिखे आचरण में भी,
युवाओं को दें ऐसे संस्कारों की विरासत।
निश्चित ही मिल जाएगी हमें राहत,
जो कम करेंगे अपनी कुछ चाहत।
@ गायत्री धन पति सिंह कुशवाहा @
