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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान

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नहीं निरर्थक जग में कुछ भी,

हर जड़-चेतन है प्रभु वरदान।

हो सार्थक अपना यह जीवन,

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान। 


विश्व शांति सबकी है कामना,

श्री गणेश करना है अपनों से। 

अद्वितीय कृति प्रभु की हैं सब,

उत्कर्ष सदा होता ऊंचे सपनों से।

आनंदित कर रहें हम आनंदित,

आनंद प्रदाता हो निज पहचान।

हो सार्थक अपना यह जीवन,

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान।



है पास जो अपने वही दे सकते,

रह खुश खुशियॉ हमने हैं लुटानी।

प्रतिफल पर ना अधिकार हमारा,

रखनी स्मृत गीता की कर्म कहानी।

हमें बनना है नहीं किसी के जैसा,

होगी निज विशिष्ट निश्चित पहचान।

हो सार्थक अपना यह जीवन,

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान। 


निंदा -स्तुति कर सके न विचलित,

अडिग सत्पथ पर है हमको रहना।

जो है न्यायोचित वही है हमें करना,

अन्याय न ही करना न ही है सहना। 

सकारात्मक ही दृष्टिकोण हो हरदम,

दृढ़ संकल्प बनाता है हमें शक्तिमान।

हो सार्थक अपना यह जीवन,

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान।


नहीं निरर्थक जग में कुछ भी,

हर जड़-चेतन है प्रभु वरदान।

हो सार्थक अपना यह जीवन,

हमारी सत्कर्मों से हो पहचान। 


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