अनुशासित नैतिकता
अनुशासित नैतिकता
जब कर्मों -वचनों की समता वाला,
हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।
स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,
नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।
दृढ़ निश्चय के संग अथक श्रम ही तो,
होता मनवांछित परिणाम हेतु जरूरी।
रही न्यूनता श्रम - निश्चय में कहीं यदि,
बहाने होते मानव-प्रकृति की मजबूरी।
सकारात्मक आशावादी दृष्टिकोण से,
पूरा होता असंभव सा भी हर सपना।
जब कर्मों -वचनों की समता वाला,
हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।
स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,
नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।
अपेक्षाएं होती हैं दुखों का कारण,
गहनता इनकी दुख तीव्रता तय करें।
मृत्यु अकाट्य सत्य है जब जीवन का,
फल पर न अधिकार तो क्यों हम डरें।
त्याग अपेक्षा रख समभाव हर हाल ही,
रह मिल जुलकर जिएं जीवन अपना।
जब कर्मों -वचनों की समता वाला,
हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।
स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,
नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।
