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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

अनुशासित नैतिकता

अनुशासित नैतिकता

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जब कर्मों -वचनों की समता वाला,

हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।

स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,

नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।


दृढ़ निश्चय के संग अथक श्रम ही तो,

होता मनवांछित परिणाम हेतु जरूरी।

रही न्यूनता श्रम - निश्चय में कहीं यदि,

बहाने होते मानव-प्रकृति की मजबूरी।

सकारात्मक आशावादी दृष्टिकोण से,

पूरा होता असंभव सा भी हर सपना।


जब कर्मों -वचनों की समता वाला,

हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।

स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,

नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।


अपेक्षाएं  होती हैं दुखों का कारण,

गहनता इनकी दुख तीव्रता तय करें।

मृत्यु अकाट्य सत्य है जब जीवन का,

फल पर न अधिकार तो क्यों हम डरें।

त्याग अपेक्षा रख समभाव हर हाल ही,

रह मिल जुलकर जिएं जीवन अपना।


जब कर्मों -वचनों की समता वाला,

हो संस्कार पूर्ण ही आचरण अपना।

स्व अनुशासित नैतिकता से हो पूरा,

नैसर्गिक प्रकृति-समाज का सपना।


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