Sudeshna Majumdar
Abstract
हम अपनी ज़िन्दगी में किसी का
आना तो तय कर सकते हैं,
पर उनका का ठहरना या जाना नहीं।
जाना उनका निर्णय होता है,
सिर्फ उनका।
जो निर्णय एक तरफा होता है,
वो कठोर और स्वार्थी होता है,
चाहे उसके पक्ष में कितने ही
तर्क क्यूं ना दिए जाए।
खिड़कियां
मन की ध्वनि
स्निग्ध संध्य...
निर्णय
मेरे साथ नदी ...
पीड़ाओं का पौ...
वो इंसान ही क्या जिसमें प्यार न हो, वो सफलता ही क्या जिसमें इन्तज़ार ना हो. वो इंसान ही क्या जिसमें प्यार न हो, वो सफलता ही क्या जिसमें इन्तज़ार ना हो.
अपना सर्वस्व गंवाया होगा गिरकर ज़मी पर अपना केंचुल छुड़ाया होगा। अपना सर्वस्व गंवाया होगा गिरकर ज़मी पर अपना केंचुल छुड़ाया होगा।
तुम जीवन धन तुम्हीं से खुशी है बदल जाती हैं भावनाएं भंवर तुम जीवन धन तुम्हीं से खुशी है बदल जाती हैं भावनाएं भंवर
फुरसतो का दरिया हैं यादों का महकमा जीना है पूरी जिंदगी बस पल दो पल में। फुरसतो का दरिया हैं यादों का महकमा जीना है पूरी जिंदगी बस पल दो पल में।
बचपन से ही इसी प्रकार मैं राखी मनाती रही बचपन से ही इसी प्रकार मैं राखी मनाती रही
तेरे पैरों की जमीन कभी आसमान नहीं होगी। तेरे पैरों की जमीन कभी आसमान नहीं होगी।
कल्पनाओं के गुलगुले आखिर कब तक खाते रहेंगे, कल्पनाओं के गुलगुले आखिर कब तक खाते रहेंगे,
शत युगों का सार, स्मित अनुरागी "आज " की अमित छाप गहरी है। शत युगों का सार, स्मित अनुरागी "आज " की अमित छाप गहरी है।
पवित्र बंधन है रक्षाबंधन युगों से चली आई है. पवित्र बंधन है रक्षाबंधन युगों से चली आई है.
चाहते हो न! ज़िन्दगी न हो मुझसे जुदा। तो खुद को मेरा ,मुकाम देना।। चाहते हो न! ज़िन्दगी न हो मुझसे जुदा। तो खुद को मेरा ,मुकाम देना।।
बातें , जो अपनी आँखो की नमी से बोल दे. बातें , जो अपनी आँखो की नमी से बोल दे.
'नरेश' की भी तमन्ना है, करूँ अर्पित स्वयं का तन ! 'नरेश' की भी तमन्ना है, करूँ अर्पित स्वयं का तन !
आप को याद करते हुए, जरा याद कीजिए। आप को याद करते हुए, जरा याद कीजिए।
बस दिल चाहता है तो, तू मिलोगा, कहीं पर भी हो, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,... बस दिल चाहता है तो, तू मिलोगा, कहीं पर भी हो, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,...
जिसके रास्ते तो बेहद खूबसूरत लगते हैं परंतु वो किसी मंजिल तक नहीं ले जाते। जिसके रास्ते तो बेहद खूबसूरत लगते हैं परंतु वो किसी मंजिल तक नहीं ले जाते।
फिर अपने बालों को नोचूँ, मैं भी अपनी किस्मत कोसूं। फिर अपने बालों को नोचूँ, मैं भी अपनी किस्मत कोसूं।
रेशम के धागों से, कभी उलझे - उलझे, कभी सुलझे से। रेशम के धागों से, कभी उलझे - उलझे, कभी सुलझे से।
उनकी स्वाधीनता का भला इससे बेहतर और क्या अंजाम होना चाहिए ? उनकी स्वाधीनता का भला इससे बेहतर और क्या अंजाम होना चाहिए ?
भाई की कलाई में बांधा धागा प्यार का रहेगा इंतजार हरदम भाई के दुलार का. भाई की कलाई में बांधा धागा प्यार का रहेगा इंतजार हरदम भाई के दुलार का.
उसके मुख पे खुशी के लिये बने कितने भाई भिखारी, ऐसी होती है इस युग में सारी बहना प्यारी उसके मुख पे खुशी के लिये बने कितने भाई भिखारी, ऐसी होती है इस युग में सारी बह...