निर्णय तुम्हारा
निर्णय तुम्हारा
मैं
अपनी कविता में
मिथ्या
नहीं लिखना चाहता,
ना मैं चाहता हूं
किसी को खुश करना,
जो है जैसा है
वैसे ही उकेर दूंगा अपने शब्दों में
सबके सामने हू ब हू,
चाहे कड़वे हो
या हल्के मीठे
उन्हें चांदी सा वर्क
नहीं लगाऊंगा,
ना परोसूंगा
कोई अतिरिक्त मिठास,
जो जिस तरह होगा
उसे वैसे ही अपनाना होगा,
बुरा लगे तो छोड़ देना
शब्दों पर अपनी आंखों की
कसमसाहट को,
अच्छी लगे
तो भर लेना
अंजुली भर आंखों में
दिल की ठंडक मिटाने को,
बस अपना लेना
या छोड़ देना
जैसा आपको
उचित लगे,
निर्णय तुम्हारा
हर हाल में
मुझे स्वीकार होगा......!!!
