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Suraj Kumar Sahu

Romance Tragedy

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Suraj Kumar Sahu

Romance Tragedy

नील मुक्तक

नील मुक्तक

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लगभग तेरे दिल से निकल कर अब हम जाने वाले हैं, 

तुझसे दूर कही जाकर तेरी याद मिटाने वाले हैं, 

नफरत करने का खूब वजह देकर तूने अहसान किये, 

तू अपनी कर परवाह मुझे भगवान बचाने वाले हैं। 


सुन मेरे दिल का हाल मैं अपना सब कुछ खोकर बैठा हूँ, 

खाकर धोखा तुझसे फिर भी तेरा होकर बैठा हूँ, 

तू भूल गया होगा वो दिन जो दिन थे मुझसे नफरत के, 

ये किस्मत की हैं बात खा अपनों से ठोकर बैठा हूँ। 


ये चंद घडी की खुशियाँ मुझको कल कि याद दिलाती है, 

बात बात का झगड़ा दूर हो जा फरियाद दिलाती है, 

माना कि मैं काबिल तेरे दिल के खातिर आज हुआ, 

औकात समझ गैरों को पूरा सपना बाद दिलाती है। 


जब साथ मैं रहना तुझको था तब तूने क्यों वह काम किया, 

दूसरों के खुशियों के खातिर केवल मुझको बदनाम किया, 

सब सहकर मैंने अपना गम कुछ कम करते टूट गया, 

सच कह दे क्या तूने पाया जो इज्जत को सारे आम किया। 



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