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Ranjeeta Govekar

Abstract

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Ranjeeta Govekar

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निःशब्द

निःशब्द

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निःशब्द आज शब्द ही,

निःशब्द हा आवाजही...

निःशब्द या भावना

निःशब्द अन अबोलही...


निःशब्द आजचा चंद्रही

निःशब्द आजचे चांदणे

निःशब्द रात्रही सरते क्षणक्षण

निःशब्द मनाचे धावणे


निःशब्द भाव अंतरी,

निःशब्द या ओठांवरी...

परी संवेदना ही अंतरी

अबोल असुनि बोलकी...


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