तेरी यादों के सहारे...
तेरी यादों के सहारे...
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तेरी यादों के सहारे....
सुकून देते हैं इस तरह से इस रूह को
जैसे तपिश से तपते रेगिस्तान में
एक बादल की छांव ठहर सी जाए
झुके और कहे सिमटती रेत से
जरा देर ठहरो यहीं पर... इसी पल...
जरा तेरी दर्द भरी तपन को
मैं अपने साए में सिमटू......
और कहे धूप से तू बरस मगर मुझ पर
तेरा साया भी गमों को मैं छूने न दूंगा
भले बह भी जाऊँ मै बूंद बूंद बारिश बनकर।
