STORYMIRROR

Ranjeeta Govekar

Abstract

4  

Ranjeeta Govekar

Abstract

तू तो है

तू तो है

1 min
707

तू तो है मिट्टी का पुतला

क्यों खुद को भगवान समझता है

जिसने तुझको बनाया मानव

देख करनी तेरी रोता है


उसने सबको दी एक धरती

पानी और आकाश दिया

तूने तो सब छिन के सबसे

खुद को ही आबाद किया


कर्म जो तुने किए थे

वही तो भुगत रहा है तू 

धरती माँ को रुलाया तुने

तो चैन से कैसे रहेगा तू


तड़पे कितने प्राणी होंगे

जब उनके जंगल तोड़ दिए

परिंदे कुछ ना बोल पाए

जब घोंसले उनके छिन गए


"आ बैल मुझे मार" किया

पर देर अभी तक नहीं हुई

पच्छाताप से धोले मन को

जागो तब ही भोर हुई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract