STORYMIRROR

Keshi Gupta

Inspirational Others

4  

Keshi Gupta

Inspirational Others

नहीं बनूंगी भार

नहीं बनूंगी भार

1 min
305

भेजी गई ससुराल में

इस शिक्षा के साथ

लांघना नहीं दहलीज़ ससुराल की

विदा होना अर्थी के साथ

जुड़ जाओ जो रिश्तों से

हो जाए सफर आसान

वरना मन मार कर भी

रहना सबके साथ

कोशिश की जीवन भर

बन ना‌ पाई बात

जिसके बनी घरवाली

वह देता नहीं है ध्यान

उसकी अपनी दुनिया है

कहने भर को बस रिश्ता है


कहा पिता से जब बेटी ने

नहीं रहना मुझको इसके साथ

आंखों में आंसू ला बोले

नहीं कुछ तेरे पास

कैसे चलेगा जीवन तेरा

मत बनना मुझ पर भार

उंगली उठाएगा समाज

होगी शर्म की बात


दावा करता जो प्यार का

जाने मन की बात

फिर भी साथ निभाने को

नहीं वह तैयार

मेरी अपनी जिम्मेवारी है

नहीं तू मेरी घरवाली

नहीं कुछ तेरे पास

कैसे चलेगा जीवन तेरा

मत बनना मुझ पर भार

उंगली उठाएगा समाज

होगी शर्म की बात


भाई बहन कुछ ना कर पाए

ऐसा है सभ्य समाज

पैसे से होती शुरू जिंदगी

अंत होता इस के साथ

ताना-वाना इस दुनिया का

बड़ा विचित्र है यार

ना मांगूँ मैं घोड़ा गाड़ी

ना मांगूँ मैं महल चौबारे

चाहिए मुझको प्यार

पढ़ी लिखी सशक्त हूं नारी

नहीं बनूंगी भार

ना हूं किसी पर भार



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational