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Bharat Jain

Tragedy Others

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Bharat Jain

Tragedy Others

नाव न बांधों आज किनारे

नाव न बांधों आज किनारे

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नाव न बांधों आज किनारे,

कब तक रहेगी इसके सहारे,


मिल जाने दो लहरों में इसको,

खो जाने दो तूफां में इसको,


भँवर में ग़र डूबना ही लिखा है,

डूबेगी तब भी ये आकर किनारे।


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