HORILAL GHRITLAHARE
Horror Tragedy Inspirational
हे नारी तू चंडिका तू काली और माता शेरावाली है
हम सब को पालने वाली और दुलार ने वाली।
ममता से ओतप्रोत सबको गले लगाने वाली है
हे नारी तू चंडिका तू काली और माता शेरावाली है।
इजहार ए बचपन
नारी तू महान ...
दर्द प्यार के
प्यार के परिं...
बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा। बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा।
नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।। नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।।
मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं। मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं।
नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है
कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से। कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से।
मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया
गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू। गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू।
गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की। गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की।
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई। जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई।
विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे, विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे,
त्रेता में श्रीराम तब आये थे, त्रेता में श्रीराम तब आये थे,
मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका। मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका।
सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार। सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार।
पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है। पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है।
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं। बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं।
जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे
जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं। जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं।
आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है