STORYMIRROR

KHUSHNUMA BI

Abstract Inspirational

4  

KHUSHNUMA BI

Abstract Inspirational

नारी पीड़ा

नारी पीड़ा

1 min
264

एक शोला बनाया जमाने ने मुझको

ताप्ती भट्टी में है झुलसाया मुझको 


मैंने कब चाहा था जमाने को दुश्मन बनाना 

जमाने ने मुझको खुद पत्थर बनाया 


मैंने तो अपने सीने में सारा जहां समाया

इस जहां ने मुझको सबसे अलग है दिखाया


क्या किया था हमने गुनाह 

इस जहां को खुद से ज्यादा था चाहा


कर बैठी थी एक खता

लोगों के लिए था हमने जीना चाहा


 खोलें थे पंख उड़ान भरने को 

रोका अपनों ने बस यही ठहरने को 


फूल बना चाहा था दुनिया में महकने को 

कांटे भी ना बनाया इस जहान ने उन पर चलने को 


ना दिया मौका हमको खिलने को



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract